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क्यों मनाते है नागपंचमी और हम आज सांपों की पूजा करते है

आज नागपंचमी का पर्व पुरे देश में बहुत हर्ष और उल्हास से मनाया जा रहा है. आज अपने विशेष रूप से संपेरो को सांप के साथ जगह जगह रास्तो में और आपके घर पर आते हुए भी पाया होगा. आखिर क्यों संपेरे आज सांप लेकर घूमते है और लोग इनकी पूजा अर्चना व् इन पर दूध चढ़ाना आज के दिन विशेष रूप से कर के खुद को धन्य समझते है?

ऐसा क्या है की शिव जी से भी विशेष दर्जा आज इन्हें दिया जाता है आज के दिन इन्हें देखना मात्र आपकी ग्रह दशाये आखिर कैसे ठीक कर देती है.

लेकिन दैनिक जीवन में इंसान सर्प को अपना दुश्मन और एक बेहद ही खतरनाक जानवर के रूप में स्वीकारता आया है. फिर अचानक एक दिन उसकी इतनी पूजा अर्चना क्यों करता है इंसान? ऐसा क्या बदल जाता है नागपंचमी में की साल के 1 दिन हम सिर्फ इनकी पूजा के लिए समर्पित करते है?

 

इसे समझने के लिए हमें पहले सांपों के महत्व को समझना होगा?

 

यह तो आपको भी पता ही होगा की भारत में कृषि मुख्यता अधिकतर लोगो के आय का श्रोत होता है क्युकी हमारी आबादी का 60% से अधिक आबादी किसान और खेती पर पूर्णतया आश्रित है. ऐसे में फसलों को नुकसान पहुचाने वाले कुछ विशेष जानवर जैसे कीड़े और मुख्य रूप से चूहे इसे विशेष क्षति पहुंचाते है. सदियों से सांप की इन कीड़ो और चूहों को खा कर हमारे खेतो में बिल बनाकर रहने और इनको नष्ट करने की जिम्मेदारी एक खास चौकीदार के रूप में निभाता आ रहे है. फिर क्यों न किसान इसे विशेष दर्जा दे?

सांप को सुगंध से बहुत लगाव होता है जैसा हम इंसान में भी पाया जाता है इसीलिए हमारे पूर्वजो के काल से ही सांप को ऊँचा स्थान प्राप्त है और इन्ही सब कारणों के चलते हम इन्हें पूज कर अच्छा महसूस करते है.

सांपों को सभी 3 लोक के स्वामी शिव जी का मुख्य आभूषण के तौर पर भी देखा जाता है और ऐसा मानना है की इन्हें पूज कर हम भगवान् शिव को खुश कर सकते है.

जब असुरो और देवता मिलकर समुन्द्र मंथन किये थे तब शेषनाग के विशेष मदद से ही अमृत निकल पाया था जिसे विशेष ताकत के तौर पर आज भी सम्मान दिया जाता है.

बरसात के दिनों में जब सभी जिव जंतु अपने बिलों से बाहर आकर सुरक्षित जगह की तलाश में हमारे घर में या आस पास अपने लिए जगह ढूंढते है तो हमें यह अपने लिए खतरा प्रतीत होते है जबकि वास्तव में यह अपने लिए एक अदद रहने की जगह तलाशते है.

ऐसे में हमें इनका विशेष ख्याल रखना चाहिए यह जानते हुए की यह हमारे पूर्वजो के काल से ही यह पूज्यनीय है. नागपंचमी में इनकी पूजा भी इसीलिए की जाती है की बरसात के दिनों में जब यह बाहर निकले तो यह किसी को नुकसान न पहुंचाए और अपने लिए सुरक्षित घर जल्द तलाश कर विश्राम करे. नागपंचमी पर हम इनकी पूजा उपासना कर उनसे यही प्रार्थना करते है की वह हमारे घरो को या हम इंसानों को नुकसान ना पहुचाये. इसीलिए नागपंचमी का उत्सव सावन के महीने में ही रखा जाता है जब यह अधिक मात्रा में हो रही बारिश के चलते अपने बिलों से बाहर आते है.

पुराणों में यह भी लिखा है की आज के दिन शिवपुराण का पाठ करने से शरीर निरोगी और स्वस्थ बनती है. आपको हमारा लेख कैसा लगा हमे अवश्य बताये.

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Manish M.

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