home Interesting Science Facts, Science Fiction आसमान का रंग नीला क्यों होता है

आसमान का रंग नीला क्यों होता है

 

दोस्तों आज में एक ऐसी चीज को लेकर आया हु जिसे आप लोग लगभग रोज देखते होंगे और हमेशा आप के मन में ये सवाल आया होगा की आसमान का रंग नीला दीखता है जरुर आसमान नीला रंग का होगा | और रात में काला रंग का | इस तरह के रोचक सवाल आप के मन में आते होंगे पर जबाब नहीं मिलता होगा |

आज हम इस पहेली को science fiction एवं  interesting science facts के माध्यम से इसको सोल्व करने जा रहे है |

 

पहले तो में आप को ये बता दू की सूर्य की एक रोशनी जो की सफ़ेद रंग की होती है लेकिन इसमें सात रंग होते है इसे आप ऐसे नहीं देख सकते है  हाँ लेकिन जब आप इसे प्रिजम से पास करते है तो ये सात रंगों में बट जाती है इसमें हम देखते है की लाल रंग की रेस कम deviate होती है जबकि वायलेट की जायदा deviate होती है |

 

science fiction and interesting science facts

 

 

decreasing order of deviation & Scattering : VIBGYOR

जिसमे हम देखते है की सबसे जायदा वेव लेंग्थ रेड कलर की और सबसे कम वायलेट कलर की होती है | Violet colour कम सेंसिटिव होने के कारण हमे इसकी जगह नीला कलर दिखाई देता है |

 

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उपरोक्त पिक्चर से स्पस्ट है की जिस कलर का वेव लेंग्थ जायदा है वो कम  scatter होती है जब की जिसकी वेव लेंग्थ कम है वो जायदा scatter होती है | अर्थात लाल रंग का वेव लेंग्थ जायदा है वो कम scatter हुई है जब की नीला रंग का वेव लेंग्थ कम है वो जायदा scatter हुई है |

 

सूर्य की किरणे जव हमारे atmosphere में आती है यानि की एयर, डस्ट स्मोग इत्यादि पार्टिकल से टकराती है तो ये किरणे scatter हो जाती है | जिसमे सबसे जायदा प्रभाबित Violet  Indigo and Blue कलर की रेज scatter होती है चुकी Violet colour  एवं Indigo कलर कम सेंसिटिव होती है  j जिससे इसका प्रभाब हमारी आखो को km दीखता है और  जबकि Blue  कलर जायदा सेंसिटिव होने के कारण इसका प्रभाब जायदा दीखता है | ये लाइट एयर, डस्ट स्मोग इत्यादि पार्टिकल से टकराती है जिसके कारण ये scatter होती है अर्थात जितना जायदा एयर, डस्ट स्मोग इत्यादि पार्टिकल मिलेगा या जितना जायदा ऐसे atmosphere में ट्रेवल करेगी ये उतना जायदा scatter  होती है अर्थात सारे  कलर में सिर्फ ब्लू पार्ट ही इन कलर से अलग हर दिशा में separate होता  है जिससे पूरा आसमान ब्लू ब्लू दिखाई देता है | और सूर्य की तरफ सीधे देखने पर रेड येलो और ऑरेंज दिखाई देती है क्यों की इस रंग की  किरणे वह  से सीधे हम तक (बहुत कम scatter हुए) पहुच  जाती है |

In Brief : सूर्य की एक किरण जो सात रंगों की होती है एयर, डस्ट स्मोग इत्यादि पार्टिकल से टकराने के बाद सबसे जायदा ब्लू कलर scatter होता है अर्थात ब्लू कलर पुरे आसमान में  बिखर जाती है और आस मन नीला दिखाई देता है और जब की सूर्य से आने वाली वही किरण  को सूर्य  की तरफ या उसके आस पास देखने पर लाल पीला या नारंगी का दिखाई देता है क्यों की ये किरणे आस मन में scatter नहीं होती और वहा से सीधे हम तक पहुच जाती है इसलिए वो  लाल पीला या नारंगी दिखाई दे जाती है

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ये याद रहे जितना जयादा गैस वातावरण में होगी, जितना जायदा डस्ट वातावरण में होगी उतना जायदा ब्लू कलर स्कैटर होगा और स्काई ब्लू दिखाई देगा |

और सर केऊपर अगर सूर्य है तो उसके पास का एरिया कम ब्लू दिखाई देता है क्यों की लाइट को ट्रेवल करने में कम दुरी अर्थात कम डस्ट वाले एरिया से होकर ट्रेवल करना पड़ता है |

sunset और sunrise के दौरान :

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दोस्तों सनसेट और सनराइज के दौरान भी यही कांसेप्ट लागु होता है पर अन्तेर इतना होता है की सनसेट और सनराइज में सूर्य होरिज्न पर होता है अर्थात उसकी किरणों को हम तक पहुचने के लिए बहुत atmosphere में जायदा ट्रेवल करना पड़ता है अर्थात बहुत जायदा ब्लू कलर scatter होती है लेकिन ये हमारे लाइन ऑफ़ साइट (line of sight) से बहुत दूर होती है जिसके कारन हमे ब्लू नहीं दिखाई देता है

जब की दुसरे कलर लाल पीला और नारंगी scatter न होने की वजय से हमारे लाइन ऑफ़ साईट पर बने रहते है और यही कारण है की सूर्य के आस पास का एरिया लाल पीला और नारंगी दिखाई देता है |

चुकी लाल रंग की वेव लेंग्थ जायदा होने से सूर्य के होरिज्न पर होने से इसका रंग लाल दिखाई देता है

मित्रो मुझे पूर्ण रूप से विश्वास है आप को science fiction एवं  interesting science facts के आर्टिकल ” आसमान का रंग  नीला क्यों होता है” और साथ ही साथ “सूर्य उगते समय या सूर्य डूबते समय उसके आस पास का रंग लाल पीला क्यों दिखाई देता है”  ये समझ में अब आ  गया होगा | अगर आप को ये आर्टिकल पसंद आया हो तो इसे आप हमारे फेसबुक पर लिखे कर सकते है ताकि हम आप को फ्यूचर में नए नए कारणों को बताकर आप का ज्ञान वर्धन कर सके |

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