home Indian History, Kashmir history in Hindi आखिर क्या है कश्मीर समस्या और इसका पूरा इतिहास

आखिर क्या है कश्मीर समस्या और इसका पूरा इतिहास

Kashmir conflict & Kashmir history in Hindi

कश्मीर की समस्या सन 1947 से ही प्रारंभ हो गई थी जब भारत धार्मिक आधार पर टूटकर भारत और पाकिस्तान दो अलग-अलग देशों में बट गया था. हालाँकि यह समस्या करीब 650 राज्यों की थी जो महाराजाओं के अंतर्गत आते थे और जो स्वतंत्र देशों के रूप में शासित राज्य थे.

विभाजन के समय, सामान्य तौर पर महाराजाओं को अपने शासित राज्य को खुला अवसर दिया गया की जिस देश के साथ जाना चाहे उस में जा सकते हैं और उनको स्वतंत्र निर्णय लेने का पूरा अधिकार भी दिया गया. इसके अंतर्गत ज्यादातर महाराजाओं ने जल्द अपना फैसला सुना दिया.

Kashmir history in Hindi

 

 

जिन राजाओं ने अंग्रेजों से लड़ाई लड़कर अपने राज्य की रक्षा की थी और एक स्वतंत्र देश के रूप में अपने राज्य को चला रहे थे उनके लिए यह फैसला बहुत अचरज भरा था क्योंकि सभी महाराजा स्वतंत्र रहकर अपना राज करना चाहते थे. लेकिन एक लोकतांत्रिक ढांचे के लिए यह बहुत जरूरी था की राज्यों का एक देश में विलय कर दिया जाए. इसका कई लोगों ने विरोध प्रदर्शन भी किया और हिंसा भी हुई लेकिन आखिरकार सभी राज्य अपने पसंद के देशों में विलय कर लिए.

अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण कश्मीर बहुत परेशान था कि वह भारत के साथ जाए या पाकिस्तान के साथ जाए. जम्मू और कश्मीर के उस समय के राजा, महाराजा हरि सिंह जाति से हिंदू थे लेकिन कश्मीर की ज्यादातर जनसंख्या मुस्लिम बाहुल्य थी इसलिए महाराजा हरि सिंह के लिए यह बहुत मुश्किल भरा फैसला था.

 

Kashmir history in Hindi

 

उन्होंने खामोश बैठे रहना ही उचित समझा और एक स्वतंत्र देश के रूप में जम्मू और कश्मीर पर शासन जारी रखना चाहा लेकिन उनके स्वतंत्र राष्ट्र की उम्मीदें अक्टूबर 1947 में टूट गई जब पाकिस्तान मुस्लिम कबीलाई को श्रीनगर उनके मुख्य द्वार तक भेज दिया जिसकी हरी सिंह को कानों-कान खबर तक नहीं लगी.

मुस्लिम कबीलाई लोग बहुत तेजी से कश्मीर पर कब्जा करते जा रहे थे, हरि सिंह को समझ में नहीं आ रहा था की वो क्या करें? उन्होंने तुरंत भारत सरकार से बात कर सैन्य बल की दरकार की. महाराजा हरि सिंह ने वादा किया कि अगर भारत सरकार अपने सैनिक टुकड़ी भेजकर मुस्लिम कबीलाई लोगों से मुक्ति दिला देगी तो महाराजा हरि सिंह बिना किसी शर्त के कश्मीर को भारत में विलय करने के लिए राजी हो जाएंगे और instrument of accession पर दस्तखत कर देंगे.

इस प्रकार से 26 अक्टूबर को महाराजा हरि सिंह ने instrument of accession पर दस्तखत कर दिए जिसके अनुसार जम्मू कश्मीर भारत का अब अभिन्न हिस्सा बन चुका था.

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भारत और पाकिस्तान कश्मीर के लिए पहली बार 1947-1948 में लड़े थे जहा भारत इस मसले को यूनाइटेड नेशन में ले जाकर Kashmir conflict सुलझाने के लिए राजी है और Kashmir conflict जो भी फैसला होगा वह भारत और पाकिस्तान के लिए सर्वमान्य होना चाहिए.

जब Kashmir conflict का मुद्दा यूनाइटेड नेशन में पहुंचा तो यूनाइटेड नेशन ने भारत और पाकिस्तान से निवेदन किया कि दोनों अपने सैन्य बल को जम्मू और कश्मीर से हटा ले और उसके बाद स्वतंत्र और निष्पक्ष रुप से कश्मीर की जनता के द्वारा उनके भविष्य के लिए चुनाव किया जाएगा.

भारत को यह पूरा विश्वास था कि वह यूनाइटेड नेशन के द्वारा किये जाने वाले चुनाव में जीत जाएगा क्योंकि उस समय कश्मीरियों के सबसे पसंदीदा नेता शेख अब्दुल्ला भारत के साथ खड़े थे और उन्हें एक आपातकालीन सरकार का निर्माण करके जम्मू कश्मीर का प्रधानमंत्री 30 अक्टूबर 1948 को भारत ने ही नियुक्त किया था.

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Kashmir conflict

 

यूनाइटेड नेशन के फैसले जिसमें कहा गया था कि पाकिस्तान और भारत दोनों अपने सैन्य बल को जम्मू कश्मीर से हटा लेंगे पाकिस्तान ने सीधे तौर पर दरकिनार कर दिया और कश्मीर पर अपने मुस्लिम काबिलाई लोगों को बनाए रखा.

1 जनवरी 1949 को समझौता हुआ जिसमें भारत जम्मू कश्मीर के 65 प्रतिशत हिस्से पर काबिज था और बाकी का हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे में था. यह एक यह आपातकालीन फैसला हुवा और मुख्य फैसले के इन्तेजार के लिए बनाया गया जिस पर भारत और पाकिस्तान दोनों राजी थे की भारत और पाकिस्तान की सैन्य टुकड़ियां अपने स्थान पर बनी रहेंगी.

1957 में कश्मीर को भारत में शामिल कर लिया गया और इसको एक विशेषाधिकार देते हुए भारतीय संविधान के आर्टिकल 370 का विशेष दर्जा देते हुए भारत में शामिल कर लिया जिसके तहत कश्मीर के बाहर के लोग कश्मीर में जमीन या घर नहीं खरीद सकते हैं.

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1965 में एक बार फिर से लड़ाई चालू हुई. भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ और एक शांति समझौता सितंबर 1965 में लिया गया जब भारत के प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और पाकिस्तान के राष्ट्रपति मोहम्मद अयूब खान ने ताशकंद में 1 जनवरी 1966 को Kashmir conflict का ताशकंद समझौता किया था.

भारत और पाकिस्तान के बीच 1971 में तीसरी बार युद्ध हुआ. इस बार पूर्वी पाकिस्तान के रूप में बांग्लादेश एक स्वतंत्र राष्ट्र का निर्माण हुवा जिसे मार्च 1971 में पूर्व पाकिस्तान के रूप में बांग्लादेश का दर्जा मिला.

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1972 में इंदिरा गांधी जो उस समय भारत की प्रधानमंत्री भी थी, जुल्फिकार अली भुट्टो के साथ मिलकर शिमला समझौता पर दस्तखत किया गया जो की ताशकंद में हुए शांति समझौते का ही रूप था. दोनों पक्ष इस बात पर राजी हो गए कि वह इस Kashmir conflict मसले का शांति से समझौता करेंगे और एक फैसला लेंगे जो दोनों देश के हित में होगा.

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दशकों तक यह मसला ऐसे ही चलता रहा फिर जवाहरलाल नेहरू भारत के पहले प्रधानमंत्री बने. जवाहरलाल नेहरु को Kashmir conflict को यूनाइटेड नेशन में ले जाने के लिए अभी तक दोषारोपण किया जाता है. जब कश्मीर पूर्णतया भारत में विलय हो चूका था और कुछ ही समय में भारत पाकिस्तानी कबिलियों को खदेड़ देने वाले थे फिर पाकिस्तानी की शर्त नेहरु जी को नही माननी चाहिए थी क्युकी महाराजा हरि सिंह ने स्वयं instrument of accession पर दस्तखत कर कश्मीर को भारत में विलय करा दिया था.

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1998 में भारत और पाकिस्तान दोनों ने सफल परमाणु परीक्षण किया और अप्रैल 1999 में परमाणु हथियारों को प्रक्षेपित करने के लिए मिसाइल भी बना डाला. पाकिस्तान में गौरी-2 मिसाइल का सफल परीक्षण किया और उसी समय भारत में अग्नि-2 का सफल परीक्षण किया.

बाद में श्री अटल बिहारी बाजपेई जी भारत के प्रधानमंत्री बने और उन्होंने 20 फरवरी 1999 को भारत और पाकिस्तान के रिश्ते सुधारने के लिए नई दिल्ली लाहौर के लिए बस सेवा का शुभारंभ किया. यह बस हफ्ते में चार दिन दिल्ली से लाहौर और लाहौर से दिल्ली चलने लगी.

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दुनिया को लगा की इन दोनों पड़ोसी मुल्कों में मित्रता की भावना जग गई है. दुनिया इन दोनों को गर्म कश्मीर मसले से हट कर दो अच्छे दोस्तों के रूप में देखने लगी लेकिन यह मित्रता ज्यादा दिन नहीं चल पायी जब पाकिस्तान की तरफ से कारगिल बॉर्डर पर गोलीबारी चलने लगी.

 

सन 1990 में पाकिस्तान ने कारगिल युद्ध छेड़ दिया जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी और 30 हजार से ज्यादा सैनिकों और आम जनता की निश्रंश हत्या हुई. अगस्त 1998 के पहले सप्ताह में भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध छिड़ गया. धीमे धीमे दोनों देशों ने विशाल सैन्य बल की टुकड़ियां अपनी अपनी सीमा पर भेज दी. 1999 में युद्ध जब ख़त्म हुवा तब भारत पाकिस्तान के करीब 2 किलोमीटर अंदर क्षेत्र तक घुस गया. भारत ने पाकिस्तान के बहुत सारे सैनिकों को कब्जे में ले लिया और गिरफ्तार कर लिया.

पाकिस्तान इस युद्ध को सिरे से नकारता रहा है और उसका कहना है की कश्मीर की जनता जो कश्मीर में आज़ादी चाहती है उसने भारत से युद्ध किया. कारगिल युद्ध में पाकिस्तान को बुरी तरह से पराजय का सामना करना पड़ा.

Kashmir conflict

इसी बीच 2016 में पाकिस्तान ने भारत के उरी कैंप पर हमला कर दिया और 18 जवानों की नींद में सोते वक़्त ही मौत के घाट उतार दिया. इस घटना से भारत को बहुत झटका लगा और भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने जवाबी कार्रवाई करते हुए 11 दिन बाद रात के सारे 12:30  बजे भारत के स्पेशल कमांडो की टुकड़ी पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में भेजकर आसपास के सभी आतंकी कैंपों को नष्ट कर दिया.

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एक अनुमान के अनुसार इस सर्जिकल स्ट्राइक में करीब 37 आतंकवादियों और पाकिस्तान के दो सैनिकों को भारत के स्पेशल कमांडो की टुकड़ी ने मार गिराया. साथ ही साथ स्पेशल कमांडो की टुकड़ी ने आस पास के लॉन्चिंग पैड और आतंकवादियों के कैम्प को नष्ट कर डाला.

भारत और पकिस्तान के बीच Kashmir conflict पर बात एकदम बंद है. पकिस्तान जहा कश्मीरियों को आतंकवादी गतिविधियों में डालना चाहता है वही सेना के कैम्प और सेना को निशाना भी बना रहा है. वही भारत पकिस्तान से बातचीत करने को तैयार है बशर्ते पकिस्तान आतंकवादियों को संरक्षण देना बंद करे और उन पर पूर्णतया लगाम लगाये.

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