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भारत में स्वास्थ्य सेवाओ का स्वरुप

दोस्तों आज हम आपको भारतीय परिवेश में स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने वाली संस्थाओं के वर्तमान सामान्य स्वरुप पर थोड़ी जानकारी प्रदान करने जा रहे हैं. ये स्वास्थ्य सेवाए विभिन्न स्तरों पर थोड़े बहुत अंतर से लगभग एक सामान पूरे देश में संचालित होती हैं.

 

स्वास्थ्य संस्थाओ के विभिन्न स्तर:

  1. जिला स्तरीय
  2. उप जिला स्तरीय
  3. ब्लाक स्तरीय
  4. सेक्टर स्तरीय
  5. पंचायत स्तरीय एवं
  6. ग्राम स्तरीय स्वास्थ्य संस्थाएं

 

 

यहाँ पर यह संदर्भित करना प्रासंगिक होगा की भारतीय स्वास्थ्य परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव 12 अप्रैल 2005 में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के आने के बाद परिलक्षित हुआ है जब स्वास्थ्य सेवाओ का सामुदायिक उन्मुखीकरण किया गया.

 

इसके फलस्वरूप उपरोक्त वर्णित स्वास्थ्य संस्थाओ की सर्विस डिलीवरी में आमूलचूल सकारात्मक बदलाव आये हैं.

 

तो आइये अब हम चर्चा करते हैं विभिन्न स्तरों पर स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने वाली संस्थाओं के सामान्य स्वरुप पर:

जिला स्तर : जिले में स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने वाली शीर्ष संस्था जिला चिकित्सालय होता है यह विभिन्न प्रकार की स्पेशलिस्ट एवं आपातकालीन सेवाए प्रदान करने में सक्षम होते हैं, जिला चिकित्सालय सिविल सर्जन के अधीन संचालित होते हैं.

उप जिला स्तर : उप जिला स्तरीय संस्था को सिविल अस्पताल या सब डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल के नाम से भी जाना जाता है अमूमन यह बड़े आकर के जिलो में स्थापित की जाती हैं.

 

ब्लाक स्तर: भारत के सामुदायिक विकास योजना १९५२ के अंतर्गत जिलो का विभाजन विकासखंडवार किया गया है.

प्रत्येक विकासखंड में एक शीर्ष सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र होता है जिसके प्रशासनिक मुखिया ब्लाक मेडिकल ऑफिसर होते हैं. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर  स्त्रीरोग चिकित्सक एवं सामान्य मेडिसिन के स्पेशलिस्ट डॉक्टर उपलब्ध होते हैं.

 

यहाँ पर सामान्य प्रसव एवं सीजेरियन प्रसव की सुविधाए प्रदान करने का भी प्रावधान होता है.

सेक्टर स्तर : विकासखंड विभिन्न सेक्टरों में विभाजित होते हैं जिसमे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के द्वारा जनसामान्य को स्वास्थ्य सुविधाएँ प्रदान की जाती हैं. प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अथवा पी एच सी का प्रशासन सेक्टर मेडिकल ऑफिसर के हाथ में होता है.

 

ये हॉस्पिटल के साथ साथ क्षेत्र में विभिन्न स्वस्थ्य कार्यक्रमों के प्रति भी उत्तरदायी होते हैं. इनकी सहायता करने के लिए सेक्टर सुपरवाइजर एवं एल एच वी (लेडी हेल्थ विजिटर) भी नियुक्त होते हैं.

 

पंचायत स्तर: लगभग दो या तीन ग्राम पंचायत के बीच एक उप स्वास्थ्य केंद्र स्थापित किया जाता है जिसके लिए सामान्य क्षेत्रों में 5000 एवं ट्राइबल क्षेत्र में 3000 जनसँख्या निर्धारित है.

उप स्वास्थ्य केंद्र या सब हेल्थ सेण्टर पर एक या दो ए एन एम् (औक्सिलारी नर्सिंग मिडवाइफ) की नियुक्ति की जाती है. इन्हें महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता भी कहा जाता है.

 

इनका उत्तरदायित्व ग्रामीण क्षेत्र में गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों का शत प्रतिशत टीकाकरण एवं सामान्य मौसमी बीमारियों से बचाव, उपचार तथा हाई रिस्क केसेस को रेफेर करना होता है.

 

ग्राम स्तर: राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के उद्भव के उपरांत ग्राम स्तरीय स्वास्थ्य सेवाओ में अपेक्षित सुधार आया है. प्रत्येक गांव में एक हजार की जनसँख्या के मान से एक एक आशा कार्यकर्ता मनोनीत की गयी हैं जो टीकाकरण, परिवार नियोजन, बीमारीओं से बचाव तथा रोकथाम पर कार्य करने वाली एक स्वैच्छिक कार्यकर्त्ता होती है.

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आशा को मान्यता प्राप्त सामजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता भी कहा जाता है. इन्हें अपने स्वैच्छिक सेवाओ के बदले स्वास्थ्य विभाग द्वारा इंसेंटिव प्रदान किया जाता है.

आशा कार्यकर्ताओं के द्वारा संस्थागत प्रसव में व्यापक बढ़ोत्तरी की गई है जिससे maternal death & child death में बहुत कमी आई है.

 

इस प्रकार हम देख सकते हैं की स्वास्थ्य सेवाओं में सामुदयीकरण के साथ निरंतर बदलाव हो रहे हैं एवं इनमे नित नवीन सुधार भी किये जा रहे हैं. हम उम्मीद कर सकते हैं की आने वाले कुछ वर्षों में हमारे देश के स्वास्थ्य सूचकांक और भी बेहतर होंगे.

 

साथियों यह लेख आपको भारतीय स्वास्थ्य सेवाओं के परिदृश्य पर एक सामान्य जानकारी प्रदान करने के उद्देश्य से लिखा गया है. लेख को सुग्राह्य एवं रोचक बनाने के लिए इसमें बहुत सारी तकनीकी बातो को जान बूझ कर छोड़ दिया गया है.

 

अगर आपको यह Quote Dictionary लेख पसंद आएगा तो हम सामुदायिक स्वास्थ्य  से सम्बंधित और भी बहुत सी रोचक-ज्ञानवर्धक जानकारियां आपके लिए लेकर आते रहेंगे.

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