home Indian History, Today In Indian History क्या बलूचिस्तान होगा नया इजराइल…!

क्या बलूचिस्तान होगा नया इजराइल…!

क्या बलूचिस्तान होगा नया इजराइल…!

विश्वव्यापी घटनाओं पर नजर रखने वालो को ये आभास है की भारतीय उपमहाद्वीप में कुछ न कुछ हलचल तो चल रही है ; जिसके चौंकाने वाले परिणाम आ सकते हैं. इसका सीधा संकेत भारत और पाकिस्तान के के बीच चल रहे कूटनीतिक युद्ध की ओर है क्युकी Kashmir Issue History किसी से छुपी नही है और इसे आर सुलझाना है तो कुछ करना होगा.

 

इसीलिए Kashmir Issue History की धुरी बना है पाकिस्तान का बलूचिस्तान प्रान्त. आइये जानते हैं की आखिर क्या है Kashmir Issue History मुद्दे के पीछे जिसने समूचे दक्षिण एशिया में नयी संभावनाओ को जन्म दे दिया है?

क्षेत्रफल के हिसाब से पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रोविंस है बलिचिस्तान. लेकिन विडम्बना ये है की ये सबसे ज्यादा गरीबी की मार झेल रहा है.

जबकि इसकी आबादी काफी कम है और यह प्रान्त प्राकृतिक संसाधनों जैसे गैस, कोयला, कॉपर से मालामाल है.  स्थानीय लोगों की मानें तो बलूचिस्तान की जनता सदैव से ही पाकिस्तान के सौतेले व्यवहार से पीड़ित रही है.

 

बलूचिस्तान के राष्ट्रवादी नेत्रित्व की वैश्विक पटल पर हमेशा से ही ये शिकायत रही है कि केन्द्रीय सत्ता ने उन्हें उनके स्वाभाविक अधिकार से वंचित कर रखा है जिससे इस क्षेत्र का आज भी उतना विकास नही हो पाया जिसका वो हकदार था.

अपनी क्षेत्रीय मांगो को लेकर बलूचिस्तान में कई संगठन अलगाववाद की लड़ाई लड़ रहे हैं. बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी, बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट, यूनाइटेड बलोच आर्मी, लश्कर-ए-बलूचिस्तान, बलूचिस्तान लिबरेशन यूनाइटेड फ्रंट जैसे संगठन बलूचिस्तान की आज़ादी के लिए पाक सरकार से लोहा ले रहे हैं.

Kashmir Issue History

पाकिस्तान में चाइना के बढ़ते दखल पर भी बलोच संगठनो को खासी आपत्ति है, पाक-चाइना economic corridor के तहत चाइना के शिन्चिआंग प्रान्त और बलूचिस्तान के ग्वादर बंदरगाह को जोड़ने की योजना को भी बलोच विरोध का सामना करना पड़ रहा है.

पाकिस्तानी सेना ताकत के दम पर इन संगठनों को कुचलने का प्रयास जरूर कर रही है किन्तु ऐसा कहा जाता है की इन अलगाववादी संगठनों को बलोच जनता का अच्छा-खासा समर्थन प्राप्त है.

सन 2006 में बलोच कबायली नेता नवाब अनवर बुगती की सेना द्वारा हत्या के बाद उमडा जन आक्रोश इसका जीता-जागता प्रमाण है. इस घटना के बाद से ही बलूचिस्तान में अलगावाद एवं चरमपंथियों को नए आयाम मिले हैं.

 

पाकिस्तान का स्टेटमेंट है की वो अलगाववादियों के खिलाफ लड़ाई में विजय हासिल कर रहा है. जबकि आम बलोच जन मानस में यह धारणा व्याप्त है की पाकिस्तानी सेना अपहरण, अत्याचार और हत्याएं करने में जुटी हुई है. ऐसे हालात में बलूचिस्तान में लॉ एंड आर्डर की स्थिति और भी बिगड़ती जाएगी ऐसा ही प्रतीत होता है.

भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब लाल किले की प्राचीर से अपने भाषण में बलूचिस्तान का मुद्दा उठाया तो पाकिस्तान को बड़ा नागवार गुजरा जबकि बलोच राष्ट्रवादी नेताओ ने इसका स्वागत करते हुए कहा की मोदी की इस पहल से बलोच समस्या को वैश्विक पहचान मिलने में मदद मिलेगी. वही Kashmir Issue History को भी solve करने में मदद मिलेगी.

 

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के विदेशी मामलो के सलाहकार सरताज अज़ीज़ ने नरेंद्र मोदी के इस वक्तव्य के सन्दर्भ में यह कहा की इससे बलूचिस्तान में हालात बिगाड़ने में भारत का हाथ होने की बात साबित होती है.

भारत diplomacy की बिसात पर पाकिस्तान के खिलाफ हमेशा से ही भारी पड़ता है लेकिन पाकिस्तान को ये बात हजम होने में हमेशा से ही दिक्कत रही है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बलूचिस्तान के साथ भारत के सांस्कृतिक समानताओ की चर्चा कर एक ओर जहा बलोच नागरिकों का दिल जीता वही पाकिस्तानी सत्ता प्रतिष्ठानों में बेचैनी बढ़ा दी.

अब पाकिस्तान Kashmir Issue History के साथ साथ अपने बलूचिस्तान के बारें में भी सोचना चालू कर दिया है.

अब तो कूटनीतिक मामलो के जानकारों ने ये भी कयास लगाने शुरू कर दिए हैं कि भारत और पाकिस्तान के बीच एक नए बफर स्टेट का जन्म होने वाला है और कुछ तो यह भी कहते हुए पाए जाते हैं कि भारत एक नया इजराइल बनाने की फिराक में है..!

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