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जब माँ के त्याग और समर्पण ने लड़के को सफलता दिला दी

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एक बार एक लड़का जो कि पढ़ाई लिखाई में बहुत तेज था एक बहुत बड़ी कंपनी में मैनेजर के पद पर नौकरी के लिए आवेदन किया. वह लिखित परीक्षा में बहुत अच्छे नंबरों से पास हो गया और उसके बाद ग्रुप डिस्कशन में भी वह पास हो गया.

इसके बाद लड़के की अंतिम परीक्षा की बारी आई, जो कि फाइनल इंटरव्यू था और यह फाइनल इंटरव्यू कंपनी का मालिक स्वयं ही ले रहा था.

 

आखिरकार वह घड़ी आ गई जिसका उस लड़के को बेसब्री से इंतजार था. कंपनी के मालिक ने उस लड़के के बायोडाटा को पूरी तरह देखा और पाया की लड़का पढ़ाई में बहुत अव्वल किस्म का लड़का था.

लिखित परीक्षा और ग्रुप डिस्कशन में भी वह बहुत अच्छे नंबरों से पास हुआ था इसलिए उस लड़के की छवि, कंपनी के मालिक की नजरों में अच्छी बन चली थी. अब बारी आ गई जब उसे कमरे में जाकर इंटरव्यू देना था.

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डायरेक्टर उस लड़के से: क्या तुमने कभी स्कूल या कॉलेज में स्कॉलरशिप ली है?

लड़का: जी नहीं.

 

डायरेक्टर: तो क्या तुम्हारे पिता ने तुम्हारे स्कूल की सारी फीस भरी है?

लड़का: नहीं! जब मैं 3 वर्ष का था तभी मेरे पिता का स्वर्गवास हो गया था. यह मेरी मां है जिसने मेरे पूरे स्कूल और कॉलेज की फीस भरी है.

 

डायरेक्टर: तुम्हारी माता जी कहां काम करती हैं?

लड़का: सर! मेरी माताजी कपड़े धोने का काम करती हैं.

 

इतना कहने पर डायरेक्टर ने लड़के को अपने हाथों को दिखाने को कहा.

लड़के ने तुरंत अपने हाथों को डायरेक्टर के सामने रख दिया. उसके हाथ बहुत ही नर्म और मुलायम थे. उस लड़के के हाथ को देखने के बाद डायरेक्टर ने उससे पूछा, “क्या तुमने कभी अपनी माता जी को कपड़े धोने के काम में मदद किया है?

 

लड़का: जी नहीं! मेरी माता जी चाहती थी कि मैं हमेशा पढ़ता रहू और जितना हो सके उतना ज्यादा अच्छे नंबर ला सकूं. यही नहीं मेरी माता जी को लगता है कि मैं उनके जितना तेजी से कपड़े नहीं धो सकता इसलिए वह काम स्वयं करना चाहती हैं.

अब डायरेक्टर ने उस लड़के से कहा कि आज तुम घर जाओ और अपने माता जी के हाथों को लेकर उनके हाथों की सफाई करो और अगर कल तुम वापस आते हो तो मैं तुम्हें बताऊंगा कि तुम्हें यह नौकरी मैं दे सकता हूं या नहीं?

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एक अच्छी नौकरी के आखिरी चरण में पहुंचकर अपनी उम्मीदों को बरकरार होता देख लड़के ने तुरंत हामी भर दी.

घर पहुँच कर उसने माँ से अपने हाथों को अपने हाथों में लेकर उन्हें धोने की फरमाईस की. यह सुनकर माँ की आँखों से आंसू बहने लगे. फिर माताजी ने ख़ुशी ख़ुशी उसे हाथ सफ्ने करने की आज्ञा दे दी.

 

फिर उस लड़के ने माताजी के हाथों को धीमे धीमे साफ करने लगा और हाथों को साफ करते करते हुए उसकी आंखों से आंसू निकल कर उसकी माता के हाथों पर गिरने लगे.

पहली बार उसे एहसास हुआ कि उसके माता जी के हाथ कितने कठोर, खुरदुरे और झुर्रीदार हो चुके थे. उनके हाथों को धोने पर माता जी को दर्द भी हो रहा था. लड़का जब माताजी के हाथ धो रहा था तो कई बार माताजी दर्द से कराह भी उठी.

 

यह पहला मौका था जब उस लड़के को पता चला की हर दिन जब वह पढ़ाई में व्यस्त रहता था तो उसकी मां कैसे अपने इन हाथों से कपड़े धो धो कर उसके स्कूल और कॉलेजों की फीस भरी है. इन हाथों में जो आज दर्द था उसी दर्द से मेरी माता जी ने मुझे इतनी ऊंचाई तक पढ़ाई करवाई है.

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आज उसे पता चल चूका था कि उसकी पढ़ाई के लिए उसकी मां ने क्या क्या किया है. अगले दिन वह डायरेक्टर से मिलने सुबह ऑफिस गया. डायरेक्टर के कमरे में घुसते ही, उसकी आंखों से आंसू निकल पड़े डायरेक्टर ने पूछा: कल तुमने क्या किया?

लड़के ने जवाब दिया कल मैंने अपनी माता जी के हाथों को और बाकी बचे कपड़ों को धोया.

 

डायरेक्टर ने पूछा: तुम्हें अभी कैसा लग रहा है?

लड़के ने जवाब दिया: सबसे पहले तो मुझे यह पता चला है की त्याग और समर्पण किसे कहते हैं, अगर मेरी मां आज नहीं होती तो शायद मैं आज यहां नहीं होता.

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दूसरी चीज कल मैंने जो अपनी माताजी की मदद किया तो मुझे एहसास हुआ की जिस कार्य को मुझे एक दिन करने में इतनी कठिनाई हुई वही कार्य मेरी माता जी ने कैसे वर्षों तक किया और मैं सिर्फ अपनी पढ़ाई में ध्यान देते रह गया जब मुझे उनकी मदद करनी चाहिए थी.

तीसरी चीज मैंने सीखा है परिवार का महत्व क्या होता है और कैसे हम अपनों के लिए त्याग करते है.

 

लड़के के इस जवाब को सुनकर डायरेक्टर ने कहा: यह तुम्हारे अंदर जो आज एहसास मुझे दिख रहा है और जो तुमने स्वयं अनुभव किया है. मुझे ऐसी ही योग्यता अपने मैनेजर के अन्दर चाहिए थी.

मैं किसी ऐसे व्यक्ति की तलाश में था जो मैनेजर का काम देख सके और वह दूसरों के द्वारा किए गए मदद को समझे व स्वावलंबन से उनकी इज्जत करें. साथ ही साथ कष्ट क्या होता है? पीड़ा सह कर कैसे दूसरों की मदद करते हैं इस बात को समझता हो.

 

डायरेक्टर ने अंत में कहा: मुझे बहुत खुश होगी अगर तुम मेरी कंपनी में मैनेजर की पोस्ट स्वीकार करोगे तो?

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है मुसीबत में अगर कोई यह ना समझ पाए उसकी जरूरतों को कैसे पूरा किया गया है तब तक वह उसकी इज्जत करना नहीं सीख पाएगा.

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