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क्या आपको कश्मीर का पूरा सच पता है?

क्या आपको पता है अंग्रेजो ने भारत पर कब्ज़ा जमाने के बाद, जम्मू और कश्मीर महाराज गुलाब सिंह को मात्र 75 लाख में बेच दिया था? जिनके वंसज श्री हरि सिंह ने बाद में भारत में विलय  या Instrument of Accession करने का निम्न agreement sign किया.

 

Instrument of Accession

“श्रीमान, मैं इन्दर महिंदर राजराजेश्वर महाराजाधिराज, श्री हरि सिंह, जम्मू और कश्मीर और तिब्बत आदि देशाधिपति, जम्मू और कश्मीर पर राज्य करने वाला, आज से अपने सम्पूर्ण राज्य को तथाकथित अग्र रूप से भारत में विलय होने के लिए निश्चय करता हु!”

हरि सिंह

महाराजाधिराज जम्मू और कश्मीर.

 

कश्मीर की समस्या (Kashmir issue History) के बारे में हम सबने सुना है लेकिन क्या आपको मालूम है की कश्मीर की समस्या वास्तव में है क्या?

अगर जम्मू और कश्मीर के राजा ने आजादी के तुरंत बाद भारत में विलय कर लिया था फिर पकिस्तान क्यों इसे लेने के लिए कोशिश करता रहता है.

क्यों जम्मू कश्मीर में आये दिन आतंकवादी घटनाएं होती है? क्यों भारत और पाकिस्तान दोनों इस पर अपना हक़ समझते है और उसके लिए लड़ते है?

 

इसे समझने के लिए हमें History of Kashmir In Hindi को खंगालना होगा. तो आइये देर किस बात की….चलते है इतिहास में.

कश्मीर का इतिहास काफी बड़ा है और रोचक भी, लेकिन हम इसे समझने के लिए History of Kashmir In Hindi के main points पे ही सिर्फ discuss करना होगा.

18th Century में, मुग़ल शासन जब पुरे भारत में फ़ैल रहा था इस समय मुग़लों का ध्यान कश्मीर के तरफ बिलकुल भी नही गया. सिक्खों ने इसी बात का फायदा उठाया और कश्मीर पर अपना शासन जमा लिया.

 

बाद में ब्रिटिश शासनकाल में अंग्रेजो ने पुरे भारत पर अपना वर्चस्व करने के बाद जम्मू कश्मीर में जाकर सिक्खों को हरा दिया. बाद में अंग्रेजो को समझ में नही आ रहा था के वो जम्मू कश्मीर का करे भी तो क्या करे?

कश्मीर को उस समय भागौलिक व् अन्य दशाओं से काफी poor state समझा जाता था इसीलिए इसे पहले मुगलों और बाद में अंग्रेजो ने नजरंदाज किया. अंग्रेजो को funds की कमी जब आई तो उन्होंने जल्दीबाजी में कश्मीर को किसी भी ग्राहक को 75 लाख रुपये में बेचने का offer दिया.

Kashmir issue History

 

डोगरा चीफ गुलाब सिंह, जो अंग्रेजो के वफादार भी थे उन्होंने वो रकम अंग्रेजो को देकर कश्मीर पर अपना राज्य कायम किया, और भारत से अलग अपना अलग कश्मीर बना लिया. सन 1846 से 1947 तक कश्मीर पर राजा बनाकर गुलाब सिंह और उनके वंसजो ने शासन किया.

अंग्रेजो के चले जाने के बाद, भारत और पाकिस्तान अलग अलग हो गए. उस समय के तात्कालिक गृह मंत्री सरदार बल्लभ भाई पटेल ने अन्य राजा वाले states को भारत में जोड़ने का प्रयास प्रारंभ कर दिया और करीब 600 रियासतों को जोड़ने में भी सफल रहे.

 

उन्होंने कश्मीर से भी आग्रह किया के वो भारत में विलय या Instrument of Accession कर ले, लेकिन गुलाब सिंह के पोते और उस समय के कश्मीर के राजा, हरि सिंह ने इस बात से सीधे मना कर दिया और स्वतंत्र देश के रूप में कश्मीर को कायम रखने का फैसला किया.

 

Kashmir issue History

अब चूँकि कश्मीर, पाकिस्तान से बहुत पास में था और पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद से इसकी दुरी भी मात्र 1 घंटे की यात्रा मात्र थी. इससे भी बड़ी बात के कश्मीर के 2/3 कश्मीरी नागरिक मुस्लिम थे. पाकिस्तानी संस्थापक मोहम्मद अली जिन्नाह की बहुत इच्छा हुई के कश्मीर पाकिस्तान का हिस्सा बन जाये.

कश्मीर के तात्कालिक राजा हरि सिंह ने 15 अगस्त 1947 तक कोई decision नही लिया के वो भारत में जायेंगे या पकिस्तान में. सबको समझ में आ गया कि वो कश्मीर को वो आजाद ही रखना चाहते है.

 

पाकिस्तान ने पहल करते हुए पहले हरि सिंह को मनाने की बात की लेकिन जब बात नही बनी तब वहा के आस पास के पाकिस्तानी कबीली इलाकों के मुस्लिमो को कश्मीर में अपना वर्चस्व जाहिर करने के लिए भेजने लगा.

उस समय Lahore के British High Commissioner C. B. Luke ने अपनी किताब, History of Kashmir In Hindi में लिखा है की पाकिस्तानीयों को कश्मीर में बहते सोने की लालच समझ आ गयी थी इसीलिए उन्होंने काबिलियो के माध्यम से कश्मीर में उपद्रव प्रारंभ कर दिया था.

 

Kashmir issue History: 24 October, 1947 को सुबह सुबह हजारों की संख्या में कबीली पठानों ने कश्मीर में घुसना प्रारंभ कर दिया और उनका एक ही मकसद था, जम्मू कश्मीर की राजधानी श्रीनगर पर कब्ज़ा करना, जहा से महाराज हरि सिंह अपना राज काज संभाला करते थे.

महाराजा हरि सिंह को जब इस बात का बता चला उन्होंने तुरंत भारत से मदद की अपील की और इस मुश्किल वक़्त में सहायता मांगी.

 

History of Kashmir in Hindi

Kashmir issue History: 24 October, 1947 को राजा हरि सिंह अपने दरबारियों के साथ जम्मू shift हो गए. और इससे महाराजा के श्रीनगर के राजमहल (palace) की सुरक्षा भी बढ़ गयी.

Kashmir issue History: अगले ही दिन 25 October, 1947 को गृह मंत्री, श्री वल्लभ भाई पटेल के करीबी अधिकारी, V. P. Menon को भेज, जम्मू और कश्मीर को भारत में विलय या Instrument of Accession होने की पेशकश की गयी, और इसके बदले पाकिस्तानियों के कबीली पठानों को खदेड़ भगाने का वादा भी किया गया.

 

History of Kashmir in Hindi

महाराज हरि सिंह के मुख्य मंत्री, M. C. Mahajan ने तुरंत तत्कालिक प्रधानमंत्री, जवाहर लाल नेहरु से किसी भी शर्त पर मदद मांगी. उन्होंने नेहरु जी को लिखा:

“हमें तुरंत जम्मू और कश्मीर में भारत की मदद चाहिए, शर्त चाहे कुछ भी हो. हमें अगर भारत अपना military force भेजने को तैयार होता है तो महाराजा हरि सिंह को जम्मू कश्मीर को भारत को देने और Instrument of Accession में कोई दिक्कत नही है. हमारी बस एक ही शर्त है भारत तुरंत श्रीनगर पहुंचे नही तो हम लाहौर जाकर मुहम्मद अली जिन्नाहह से समझौता करने को मजबूर होंगे.”

 

Mahajan ने बताया की अगले सुबह सुबह उठने से पहले हमें श्रीनगर के ऊपर तमाम हवाई जहाजो के उड़ने की आवाज आने लगी और मुझे समझने में देर नही लगा के भारत हमारे उम्मीदों से पहले ही हमारी सुरक्षा के लिए आ खड़ा हुवा है.

जल्दी ही श्रीनगर से कबीली पठानों को मार भगाया गया. लेकिन कश्मीर के अन्य हिस्सों पर पाकिस्तान गुपचुप तरीके से कब्ज़ा करने का कार्यक्रम बनाने लगा.

 

इसी सन्दर्भ में, मुहम्मद अली जिन्नाह ने British Commander से request भेजी के रावलपिंडी और सियालकोट से British Commander, Sir Douglas Gracey 2 ब्रिगेड army को जम्मू भेजे और महाराज हरि सिंह को arrest करे.

British Commander, Sir Douglas Gracey ने जिन्नाह की इस मंशा को तुरंत ख़ारिज कर दिया.

 

मुहम्मद अली जिन्नाह को जम्मू और कश्मीर का भारत में जाना पच नही रहा था. उनके अन्दर के लालच के चलते दिमाग में उधेड़बुन चलने लगा कि कश्मीर को कैसे हथिया लिया जाए.

Lord Mountbatten ने बाद में History of Kashmir In Hindi में बताया है कि उनके साथ जिन्नाह ने कई बार कश्मीर को लेकर meetings की. उन्होंने कहा की जिन्नाह का मानना था के, “भारत का कश्मीर पर अधिकार, हरि सिंह के स्वेच्छा से नही बल्कि भारत के जोर जबरदस्ती से कराया हुवा षडयंत्र है.”

 

Kashmir issue History

 

जिन्नाह ने आगे कहा, “मुझे बहुत अच्छे से मालूम है की महाराज हरि सिंह अपने महत्वकान्छाओ के चलते कश्मीर को हमेशा एक स्वतंत्र राज्य रखना चाहते है, अब अगर कश्मीर भारत में विलय या Instrument of Accession हो रहा है इसका सीधा सा मतलब है के हरि सिंह के साथ जोर जबरदस्ती भारत कर रहा है, और ऐसा अनैतिक कृत्य हमें नामंजूर है.”

इधर धीमे धीमे पाकिस्तान ने कश्मीर में अपनी फ़ौज भेजना जारी रक्खा. इस बात की ना तो हरि सिंह को ना ही भारत को जरा सी भी भनक लगी.

 

भारत को जब ये पता चला उसने पाकिस्तानी फ़ौज को वहा से भगाना चालू किया. भारत की फ़ौज पाकिस्तानी कबिलियो पठानों से और पाकिस्तानी फ़ौज से लड़ती रही और उन्हें पीछे धकेलते रहे.

चुकि कश्मीर की भगौलिक परिस्थितिया (Geography Structure) काफी विषम है इसलिए इस कार्य में समय तो लगना ही था.

 

यह एक युद्ध के तरह करीब 1 साल से ज्यादा चला और भारत जल्द ही कश्मीर के 2/3 भाग पर कब्ज़ा कर लिया. लेकिन भारत सरकार द्वारा 1948 के अंत तक United Nation के दखल से इस युद्ध को रोकना पड़ा. दोनों देशों ने United Nation की बात मानते हुए 5 जनवरी 1949 को युद्ध विराम की बात मान ली.

यहाँ पर नेहरु जी भी कई मायनों में जिम्मेदार थे, इसे जानने के लिए पढ़े:

क्यू और कैसे पंडित नेहरु जिम्मेदार है कश्मीर समस्या के लिए.

भारत और पाकिस्तान को कश्मीर को लेकर अपनी अलग अलग राय है, जो शायद आप अब तक समझ भी गए होंगे.

 

Kashmir issue History: भारत सरकार का कहना है, “26 October, 1947 को महाराजा हरि सिंह ने लिखित विलय या Instrument of Accession पर signature किया हुवा है जो भारत व् अन्तराष्टीय नियम व् कानून के मुताबिक़ एकदम सही है और कश्मीर भारत का अभिन्न अंग हो जाता है, यह विलय (Instrument of Accession) कश्मीर के सभी पार्टियों द्वारा सहमति से भी बना हुवा है.”

 

वही पाकिस्तान सरकार का कहना है, “कश्मीर को विलय करने का प्रयास सबसे पहले पाकिस्तान ने प्रारंभ किया. 26 October, 1947 को महाराजा हरि सिंह ने जिस लिखित विलय या Instrument of Accession पर signature किया है वो उनसे जोर जबरदस्ती करवाया गया, जो अंतररास्ट्रीय नियमों के भी खिलाफ है और पकिस्तान इसे कभी नही स्वीकार सकता.”

दोस्तों, यह article मैंने बहुत सारे authorized resources पर study करने के बाद लिखा है और reality रखने का कोशिश किया है. कृपया अपने feedback’s और comments अवश्य दे.

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One thought on “क्या आपको कश्मीर का पूरा सच पता है?

  1. Very excellent detail about the history of Kashmir. I really enjoy reading this wonderful article. You really have studied in depth and write it accordingly. It is indeed the full history of Kashmir in Hindi i have ever read.
    Thanks!

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