home Inspirational Stories अगर आपको लगता है आप कुछ नही कर सकते तो यह अवश्य पढ़े.

अगर आपको लगता है आप कुछ नही कर सकते तो यह अवश्य पढ़े.

बहुत बार ऐसा होता है की हमारे जीवन में उतार-चढाव आते है. ऐसा कोई भी इंसान नही है जो अच्छे और बुरे दौर से ना गुजरा हो. कभी-कभी इंसान थक हार खुद को इतना कमजोर मान लेता है की जहा हम जीत भी सकते है वहा भी हम बिना प्रयाश के हार मान लेते है.

दोस्तों! जीवन में उतार-चढाव तो लगा ही रहता है. मेले में पकौड़ी बेचने वाले धीरुभाई अम्बानी किस तरह से भारत के सबसे अमीर आदमी बन गए इसका सबसे अच्छा उदाहरण है.

धीरुभाई अम्बानी की पुरी कहानी पढ़े.

हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी जी को ही लीजिये, सभी जानते है की वडनगर रेलवे स्टेशन पर चाय बेचने वाले उस बालक ने कभी हार नही मानी और भाग्य से लड़कर अपना मुकाम हासिल किया.

 

अब कुछ लोग कह सकते है कि ये उनकी किस्मत थी, विधि का विधान था या उनकी किस्मत में लिखा था. जी नही, बिलकुल नही….किस्मत पर दोष मढने वाले लोग अक्सर निराशावादी होते है और अपने ही काम की उपेक्षा करते है, भले पूरी दुनिया उनकी काबिलियत की तारीफ़ करे वो इसे गलत समय मान अपने अन्दर के गुणों को भूल जाते है और भाग्य को कोसते है.

ऐसे लोग अक्सर अपने ही काम से खुश नही होते. भले ही लाख काबिलीयत उनमे हो लेकिन उन्हें अपनी कमजोरी खोजने में व्यस्त रहना ज्यादा पसंद आता है क्युकी वो हार मानना चाहते है.

 

चलिए, आइये ऐसे ही एक अनोखी और सच्ची कहानी आपके सामने रखता हु, जिसे पढ़कर आप अवश्य मेरी ऊपर लिखी बातों पर यकीन करना शुरू कर देंगे.

एक बार एक इंसान जिसका नाम Anthony Burgess अपनी 40 वर्ष की उम्र में उसे पता चला की उसे brain tumor है और वह सिर्फ 1 वर्ष ही और जी पायेगा. यह सुनते ही उसके सर पर मानो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा हो.

उसके पास जीवन का सिर्फ 1 वर्ष और है……..

 

अब यहाँ देखिये दोस्तों उसके पास 2 संभावनाए है……या तो वह इस गम में रोज घुट-घुट कर जिए या कुछ अच्छे फैसले ले.

खैर, उसने देखा की उसके पास ना तो इतनी संपत्ति है ना तो इतने पैसे, जिसे वह अपने बीबी बच्चो के बेहतर भविष्य के लिए छोड़ के जाए.

उसे अगले साल अपने बीबी, बच्चो का भविष्य बिलकुल साफ़ दिख रहा था जिसे लेकर वह काफी परेशान भी रहने लगा.

Anthony Burgess

Brain tumor की वजह से वह ज्यादा मेहनत वाले कार्य कर भी नही सकता था क्युकी उसे पूरी तरह से आराम करने की हिदायत दी गयी थी.

बिना कोई समय गंवाए उसने तुरंत फैसला किया की वो कुछ उपन्यास लिखना चाहेगा क्युकी घर बैठ कर बिना मेहनत के यह एकलौता ऐसा काम उसे दिखा जो वो कर सका था. उसने सोचा की अगर हो सका तो कोई उपन्यास का बढ़िया खरीदार मिल जाए और उसकी सारी परेशानी दूर हो जाए.

जीवन में कभी लिखने का कार्य ना किये होने के कारण बहुत डर भी था की उपन्यास छप भी पायेगा की नही?

 

खैर, उसने अपनी पत्नी से पेपर और टाइपराइटर मंगवाया और अपने उपन्यास लिखने के कार्य में खो गया.

उपन्यास लिखने से पहले उसका सिर्फ एकमात्र मकसद था की अपने बीबी और बच्चो के लिए एक अच्छी रकम छोड़ जाना जिससे उन्हें किसी के आगे भींख ना मांगनी पड़े. हालाँकि उपन्यास सफल रहेगा या नही, एक नौसिखिया लेखक को इसका भी डर था, लेकिन और कोई रास्ता अब नही बचा था.

Anthony Burgess ने बताया, डॉक्टर ने उसे कहा की, इस साल की सर्दी, गर्मी और सावन को महसूस करने का उसका आखिरी वर्ष होगा.

 

समय की कमी को Anthony Burgess ने बहु अच्छे से समझा और ठान लिया;

मुझे लिखना है तो सिर्फ लिखना है!

उपन्यास को सफल होना है तो होना है!

Anthony Burgess

 

यही मकसद से वह उपन्यास की दुनिया में अगले एक साल तक डूब गया.

पुरे 1 वर्ष में Anthony Burgess ने कुल 5 उपन्यास लिख डाले और छंटे (6th) उपन्यास को लगभग आधा हिस्सा ख़त्म कर लिया था. आपको शायद यकीन ना हो लेकिन कोई भी महान उपन्यासकार भी आज तक इतना उपन्यास अपने पुरे जीवनकाल में ही शायद लिख पाए.

 

समय का अभाव और त्रिव इक्षाशक्ति, Anthony Burgess को 5 उपन्यास सफल तरीके से ख़त्म करने का जज्बा देती रही और वो बेकार सा इंसान यह कर दिखाया.

Anthony Burgess अपने उपन्यास लेखन में इतने व्यस्त हो गए की उन्हें यह भी याद नही रहा की वो बीमार है. वो अपने 6th उपन्यास को ख़त्म करने की तल्लीनता में कैंसर को मात देकर 2-3 महीने आगे निकल गये.

आखिरकार उपन्यास ख़त्म करने के बाद जाँच में सामने आया की उनका brain tumor भी एकदम ख़त्म हो चूका है और वह एकदम स्वस्थ्य है. उनके सभी 6 उपन्यास को लोगों ने बहुत सराहा और वह बहुत जल्द एक प्रशिद्ध उपन्यासकार और लेखक के रूप में छा गए.

Anthony Burgess

शायद इतने किताब वह कभी नही लिख पाते और इस दुनिया को एक आम इंसान के अन्दर का उपन्यासकार और लेखक कभी नही बाहर आ पाता.

हम में से बहुत सारे Anthony Burgess जैसे ही है, जो अपनी खूबियों को छुपा कर रखे है और बहुत ही नाजुक परिस्थितियों का इन्तेजार कर रहे है जब हमें खुद अपने अन्दर का वह महान इंसान दिखेगा और हम मज़बूरी मे निखर के बाहर आयेंगे. शायद हो सकता है आपके साथ वो मज़बूरी ना आये और आपके अन्दर का वो महान इंसान अन्दर ही ख़त्म हो जाए.

आप स्वयं से पूछिये अगर आपके सामने Anthony Burgess जैसी परिस्थिति बन जाए तो आप क्या करेंगे?

 

जब आपको यह बात पता चले की हमारी आराम से चल रही जिंदगी में कल का आने वाले दिन से सिर्फ और सिर्फ 1 साल और बचा है?

आप इस 1 साल को कैसे जियेंगे? आप इस 1 साल को कितना अलग बनाएंगे? आपको तेजी से फैसले ले कर कैसे काम करना होगा?

मित्रों अगर Anthony Burgess एक साल में इतना बड़ा कुछ करने का सोच सकते है और कर सकते है तो आपके पास तो पुरा जीवन पड़ा है खुद को शाबित करने के लिए.

 

क्यों ना अपने खामियाँ गिनना छोड़ हम अपने गुणों को बाहर निकाले और खुद को दुनिया के सामने शाबित करे की हम क्या कर सकते है. दिखा दे हम अपनी काबिलियत को….

लेकिन इसके लिए जरुरी है खुद पर भरोशा और वो पहला कदम उठाने का जो हमारा इन्तेजार कर रहा है…….

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